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घड़ियाल ने आखिरकार दो आंसु बहा दिये
कम्बख्त मछलियों तुम्हे और क्या चाहिये ?
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टपोरी डायलाग देखकर, दिये वाल्मिकी रोय
छद्म राष्ट्रवाद के आगे, साबुत बचा न कोय
साबुत बचा न कोय, नहीं भगवान को छोड़ा
हनुमान की जिव्हा तक को तोड़ा और मरोड़ा
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सत्ता पर काबिज हो चुका बकासुर
पर इसमें उस बेचारे का क्या ही कसुर
दोषी हैं एकचक्रा नगर के अधिवासी
जिन्होंने अध्यक्ष उसे बनाया हजुर
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मेरी सांसों की जांच के लिये
वे पिता-तुल्य हाथ, बार-बार
मेरे स्तनों को छूते
मेरे पेट को स्पर्श करते,
और मेरी जांघें टटोलते रहे
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कल चमन था आज इक सहरा हुआ
देखते ही देखते ये क्या हुआ …..
मुझ को भ्रष्टाचार का कोई ग़म नहीं
ग़म है भ्रष्टाचार का क्यूँ चर्चा हुआ
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Boycott all Chinese goods
Thundered the mighty patriots
No rush, whispered the reality
There will be many caveats
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कल हुआ उनके घर सर्वेक्षण
सघन सर्वेक्षण...
याने छापा?
नहीं, नहीं, महज अन्वेषण
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राक्षस को हराना, मुश्किल नहीं
बेमानी है उसपर सीधा वार
जाना पड़ता है सात समंदर पार
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सत्ता के मद में चूर विकास ने
पर्यावरण को
हिकारत से देखा
और दरबार से बाहर कर दिया
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सफेद चादरें भी लज्जित हैं आज
न जाने उन्होंने कितने कुकर्मों को ढ़क दिया
लज्जित हैं दीवारों के ताजा रंग
जिन्होंने कितनी बदबूओं को रातों रात दबा दिया
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घडियाल के आंसुओं ने, भेड़ियों तक
यह ख़बर पहुंचा दी
कि अब तुम्हे मिल गयी मेमनों के
शिकार की आजादी
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ये छापे ये ट्रोलिंग ये कोर्ट की इनायत, ये जेल की हवा
कहा शासकों ने कि हर इक विरोध की यही है सजा
ये छापे ये ट्रोलिंग .....
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सांड को क्या मालूम
चर गया खेत को कोई चोर
वो आवारा खेत में घूमे
किसान मचाये शोर
ओS ओS ओS .. सांड को क्या मालूम…
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खा गया गल्ला खाने दो
रूपये भी खाये, खाने दो
ले गया राशन, ले जाने दो
वोटों का डर है कड़ी टक्कर है
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मैं सिमला बना दूंगा
मगर इन चुनावों के बाद
मैं गर्मी मिटा दूंगा
मगर इन चुनावों के बाद
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राजा ने घोषित कर दिया - अमृत काल
रानी की ‘अर्थ’पूर्ण मुस्कान बोली - अमृत काल
हमें इतिहास लिखने से कौन रोक सकता है?
गरजा कोतवाल - अमृत काल
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भीड मे मास्क नज़र आए थी हसरत उसकी
कब से जारी है नसीहत भी चुनाव आयोग की
किसने जाना है बदलते हुए वोटर का मिज़ाज़
उसको धमकाओ तो देखोगे भी फ़ितरत उसकी
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वोटों से छूलो तुम
मेरी जीत अमर कर दो
झांसे में आके मेरे
मेरी सीट अमर कर दो
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जब हम लड़ें तो आयोग भी अपना न साथ दे
जब तुम लड़ो तो ईडी लड़े, सी बी आय लड़े
जब हम रुकें तो साथ जुटे बेबसों की भीड़
जब तुम रुको तो पूरी ही सरकार जुट पड़े
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शायद चुनाव में हार का ख्याल अब सताया है
इसीलिए पापा ने मेरे, तुम्हें चाय पे बुलाया है
अच्छा S S S…….
कमजोर समझ कर, आयोग को ये, जाल बिछाया है
इसीलिए पापा ने तेरे, मुझे चाय पे बुलाया है
क्यों है ना ? (कड़े तेवर के साथ)
नहीं नहीं सर.....(सफाई की मुद्रा में) आप गलत समझ रहे हैं..