(साहिर लुधियानवीसे क्षमायाचना सहित)

जब हम लड़ें तो आयोग भी अपना न साथ दे
जब तुम लड़ो तो ईडी लड़े, सी बी आय लड़े
जब हम रुकें तो साथ जुटे बेबसों की भीड़
जब तुम रुको तो पूरी ही सरकार जुट पड़े

ये सत्ता के गुरूर में डूबी हुई नजरें
ये इश्तेहारों के नूर में डूबी हुई ख़बरें
रसूख़ के दम रियाया को कुचलते हुए शोहदे
मैं दूँ भी तो क्या दूँ ऐ उम्मीदे नज़ारों
हर ओर रहे घूम अब कोतवाल के शोहदे

अरे इन्साफदां तू इधर, कभी तो निगाह कर
कब तक वर्दी-ए-बेलगाम सहें ख़ामोशी से हम
तंग आ चुके हैं कश्मकश-ए-कानूनों से हम
ठुकरा न दे जम्हूरियत को कहीं बे-दिली से हम
(आवाज़: भाई, कोई खुशी का गीत सुनाओ)

हम ख़ौफ़ज़दा हैं, लाएं कहाँ से खुशी के गीत
देंगे वोही जो पाएंगे इस ज़िंदगी से हम
ग़र मिले जम्हूरियत को कभी इत्तेफ़्फ़ाक़ से
जानेंगे अपना हाल, उसीकी बेबसी से हम

उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले
माना के दब गए हैं झूठे प्रचार से हम
तोड़ेंगे नहीं आज भी हम रिश्ता-ए-उम्मीद
हां आपसे कभी पर ग़िला ना करेंगे हम

चल देंगे अपनी राह अब न रोकेंगे ये क़दम
ना साथ आये कोई तो अकेले चलेंगे हम

छवि सौजन्य: पिक्साबे

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