खामोश, जंग अभी जारी है ......
इसकी ही बदौलत तो, बची कुर्सी हमारी है
रूकी जैसे ही जंग, हमें
फौरन जनता निपटायेगी
हमारे खिलाफ लोगों में, अभी आक्रोश भारी है
य़ुद्ध ही दबाये रखता है
विरोध के स्वर और उठते सवाल
इस पर ही टिकी हुई, निरंकुशता हमारी है
युद्ध रूका गर एक सीमा पर
बमबारी दूजी पर होगी
कायम रखने यह युद्धोन्माद, सीमाएं ढ़ेर सारी हैं
युद्धोन्माद हर अत्याचारी का
क्षणभंगुर पर रहता है
उसके अहंकार पर नियति की, बस एक मुस्कान भारी है
खामोश, जंग अभी जारी है ......
छवि सौजन्य: कृत्रिम बुद्धिमत्ता
